हर हाल ख़ुशहाल – भाग 1

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आज़ादी के ७५ साल पुरे होने पर ‘आज़ादी की अमृत महोत्सव’ मनाती यह पुस्तक समर्पित है देशवासियों को जिन्होंने सदैव अपना अटल विश्वास बनाएं रखा – आज़ादी के आंदोलन (1757 -1947 ) के दरम्यान…आज़ादी मिलने के बाद की व्यवस्थापन (1947-1990) के दरम्यान… और हाल फिलहाल में आए कोरोना काल (2020 …) के दरम्यान ।

तीन भागों में लिखी गई यह पुस्तक श्रृंखला – ‘हर हाल खुशहाल’ एक अवसर है ‘आशा’ और हौसले के जज़्बात के प्रति श्रद्धा को व्यक्त करने की।
हमारे देशवासियों के समक्ष ऐसे अनगिनत मौके आए जहाँ आशा के दामन थामे उन्होंने सभी कठिनाइयों का डटकर न सिर्फ सामना किया बल्कि उन पर बखूबी काबू भी किया।
फिर चाहे ‘हार’ को पायदान बना कर ‘जीत’ की सीढ़ी चढ़नी हो या ‘परिवर्तन’ को जीवन का मूल मंत्र बनाना हो…अपने नेतृत्व कौशल का करिश्मा दिखाना हो या दूसरो के साथ केमेस्ट्री बनाने के लिए ‘पहले पाँच मिनट की मिस्ट्री’ सुलझानी हो… बॉस की डाँट की ‘गाँठ’ बनानी हो या खुद की ‘नेटिकेट’ दुरुस्त कर सोशल स्किल्स सुधारने हो ताकि कार्यस्थल पर मिस्टर ‘डिपेंडेबल’ बनने में कुछ कमी न रह जाए।

ऐसी तमाम बातें जो हमारे आशावादी हौसलों को दर्शाती हैं या दूसरों के संघर्षों से सिखाती हैं , इस ‘हर हाल खुशहाल’ पुस्तक श्रृंखला के तीनों किताबों में विस्तार से चर्चा करने का प्रयास किया गया है ।

लेखक: प्रो (डॉ) शालिनी वर्मा ‘लाईफ़ोहोलिक’
पेपरबैक: 134 पृष्ठ
प्रकाशक: Books33
पहला संस्करण : 2022
भाषा: हिन्दी
ISBN- 978-81-955715-5-0

अनुमानित शिपिंग समय: 7-9 दिन

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आज़ादी के ७५ साल पुरे होने पर ‘आज़ादी की अमृत महोत्सव’ मनाती यह पुस्तक समर्पित है देशवासियों को जिन्होंने सदैव अपना अटल विश्वास बनाएं रखा – आज़ादी के आंदोलन (1757 -1947 ) के दरम्यान…आज़ादी मिलने के बाद की व्यवस्थापन (1947-1990) के दरम्यान… और हाल फिलहाल में आए कोरोना काल (2020 …) के दरम्यान ।

 

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