चलो अतीत से उजियारा मांग लाये

प्रो. (डॉ.) शालिनी वर्मा ‘लाईफोहोलिक’

जब भविष्य अस्पष्ट लगे
जब पहर-पहर प्रहार करे
घड़ी की टिक-टिक प्रलय का सिंघनाद करे
चलो अतीत से उजियारा मांग लाये ।

अतीत में माँ थी, पिता थे
भाई बहनों का शोर था
चूल्हे से उठता धुयाँ था
घर का कोना-कोना उजियारा था ।

अब अपनी ही स्वांस अवसाद दे रहे,
पीड़ा से प्राण भी प्रयाण की तैयारी कर रही,
स्वयं पर लिखे गए शोक सन्देश दिख रहे;
चलो अतीत के उजियारे में समां जाये ।

लेखिका के बारे में:

सत्याग्रह की पुण्य-भूमि मोतिहारी, पूर्वी चंपारण, बिहार की निवासी प्रो. (डॉ.) शालिनी वर्मा ‘लाईफोहोलिक’  एक कम्युनिकेशन प्रोफेसर-सलाहकार, बॉडी-लैंग्वेज विशेषज्ञ, लेखक-स्तंभकार, अभिनेता-मॉडल-पटकथा लेखक के साथ साथ  बुक्स 33 और संवादशाला सह-संस्थापक भी हैं।

डॉ वर्मा  से सम्बन्ध स्थापित करने के लिए [email protected] पर लिखें

Want to read more short stories like this? Check out our Short Stories, Poems & Songs page, here you will find more such content.

One Comment

  • Komal Shruti says:

    सुंदर! इस कठिन समय में यह कविता आशा की किरण जगा रही है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.