नवरात्रि को दुर्गा पूजा, दशहरा इत्यादि नामों से भी जाना जाता है। यह हिंदुओं के द्वारा मनाये जाने वाले सबसे बड़े त्योहारों में से एक है। यह एक बहुत ही प्राचीन त्योहार है। लोगों का मानना है कि वैदिक युग के पहले से ही इस पर्व को मनाया जा रहा है। इसमें देवी दुर्गा की पूजा आराधना की जाती है। यह पर्व 9 दिनों तक मनाया जाता है, इसीलिए इसे ‘नवरात्रि’ कहा जाता है। नवरात्रि का अर्थ होता है- नौ रातें। नवरात्रि के दौरान नौ अलग-अलग देवियों की पूजा की जाती है, जिनके नाम इस प्रकार हैं- शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिरात्री।  हर देवियों के नाम का एक विशेष संदर्भ और अर्थ होता है। दसवां दिन दशहरा के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर कई हिस्सों में मेला लगता है। यह मेला दुर्गा पूजा का केंद्र होता है। मेले में मनोरंजन और खरीद-बिक्री सम्बन्धी कई गतिविधियां होती हैं।
नवरात्रि भारत के गुजरात, पश्चिम-बंगाल, बिहार और उत्तरप्रदेश जैसे राज्यों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। पश्चिम-बंगाल में दुर्गा पूजा का उत्सव सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। पूरे भारत से श्रद्धालु यहां दशहरा का उत्सव देखने आते हैं। इस अवसर पर यहां नाना प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पूरा पश्चिम-बंगाल इस दौरान दशहरा के भव्य पंडालों और मेलों से पटा हुआ रहता है। जिस प्रकार महाराष्ट्र गणपति पूजा के लिए प्रसिद्द है, उसी प्रकार पश्चिम-बंगाल दुर्गा पूजा के लिए प्रसिद्द है। यहाँ हर साल बनने वाले मूर्तियों में रचनात्मकता देखने को मिलती है। कोरोना महामारी से जूझ रहे इस समय में इस बार बंगाल के कलाकारों ने मूर्ति-निर्माण में एक बार फिर से अपनी रचनात्मक्ता दिखाई है। इस बार दुर्गा की प्रतिमा एक डॉक्टर के रूप में बनाई गई है और साथ ही महिषासुर को कोरोना वायरस के रूप में बनाया गया है।  यह पूरे देश में चर्चा के केंद्र में है।
इसी प्रकार, गुजरात में भी दशहरा धूमधाम से मनाया जाता है। दशहरा के अवसर पर गुजरात में ‘डांडिया’ और ‘गरबा’ उत्सव प्रसिद्ध है। नवरात्र के त्योहर की तिथियां चंद्र कैलेंडर के अनुसार निर्धारित की जाती हैं। देवी दुर्गा को केंद्रित कर इस पर्व को हिंदू समाज में पवित्रतापूर्वक मनाया जाता है। इस पर्व की सबसे बड़ी खासियत यह है कि भारत के हर हिस्से में यह अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। श्रद्धालु देवी दुर्गा को खुश करने के लिए 9 दिन का उपवास रखते हैं। कहीं-कहीं यह उपवास नहीं भी रखा जाता है। नौवां दिन अंतिम दिन होता है, जिसे महानवमी  के नाम से जाना जाता है। इस त्योहार को मनाने के पीछे एक मिथकीय कथा प्रसिद्ध है- महिषासुर नामक एक दैत्य की तपस्या से खुश होकर देवताओं ने उसे अमर होने का वरदान दे दिया था। इसके बाद देवताओं को इस बात की चिंता सताने लगी थी कि यह कहीं अमर ना हो जाए। इसने सूर्य, चंद्र, इंद्र, अग्नि और वायु जैसे देवताओं के सारे अधिकार छीन लिए थे। इसके उपरांत देवताओं ने महिषासुर के नाश के लिए देवी दुर्गा की रचना की।  कहा जाता है कि दुर्गा और महिषासुर का कुल 9 दिनों तक संघर्ष चला था। इसके बाद दुर्गा ने महिषासुर को मार गिराया। यही कारण है कि देवी दुर्गा को ‘महिषासुर मर्दिनी’ के नाम से भी जाना जाता है।
कोरोना महामारी के कारण इस बार हर बार की तरह नवरात्र का त्योहार नहीं मनाया जा रहा है। मेले और पंडालों में सीमित व्यवस्था बनाई
गई है। इसके बावजूद देवी दुर्गा को लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। इस पर्व को साल में २ बार मनाया जाता है। नवरात्री के अंतिम दिन कन्या-पूजन की जाती है। इसमें 9  छोटी-छोटी बच्चियों को नए-नए वस्त्र और आभूषण पहनाये जाते हैं और फिर उसे भोजन कराया जाता है।

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