“हिंदी है हम वतन है हिंदुस्तान हमारा”

उपरोक्त पंक्ति में हिंदी और हिंदुस्तान का गहरा सम्बन्ध लेखक ने चंद शब्दों में व्यक्त कर दिया है  आज हिंदी भी केवल हिंदुस्तान से ही नहीं रह गया किंतु समग्र विश्व आज हिंदी सीखने को लालायित रहता है . लोगों का हिंदी की ओर आकर्षण का कारण है इसका सरलतम प्रयोग . संस्कृत भाषाओं जननी कहा गया है और हिंदी संस्कृत का ही सरलतम रूप है। हिंदी के इन्ही महत्वों के कारण उसे विश्व में एक अलग स्थान प्राप्त हुआ और एक दिन को हिंदी के नाम कर दिया गया।

विश्व हिंदी दिवस हर वर्ष 10 दिसंबर को संसार भर में मनाया जाता है . इसका उद्देश्य हिंदी का प्रचार प्रसार करना, उसके लिए एक वातावरण निर्मित करना, हिंदी के प्रति लोगों में अनुराग की भावना जागृत करना, हिंदी की दशा में जागरूकता फैलाते हुए  उसे एक अंतर्राष्ट्रीय भाषा में रूप में प्रस्तुत करना है।  इसकी पहल हमारे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वर्ष 2006 में की थी और तभी से भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे हर वर्ष 10 जनवरी को विदेशों में मानना आरम्भ किया . यह दिन विदेशों में भारत के  दूतवासों के लिए बहुत खास होता है . सभी सरकारी कार्यालयों में विभिन्न विषयों पर हिन्दी में व्याख्यान आयोजित किये जाते हैं। विश्व में हिन्दी का विकास करने और इसे प्रचारित-प्रसारित करने के उद्देश्य से विश्व हिन्दी सम्मेलनों की शुरुआत की गई और प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ था इसीलिए इस दिन को ‘विश्व हिन्दी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

हिंदी महज़ एक भाषा नहीं बल्कि एक भावना है किंतु दुख तो तब होता है जब हम आये दिन अनजाने में अपनी भाषा का कईओं बार अपमान करते है।  दशा यह है कि हमारे देश के बड़े और  बच्चे भी विदेशी भाषा बोलने में गौरवांतित महसूस करते है और अपनी हिंदी को हेय दृष्टि से देखते है।  यह सब देख ये आवश्यकता और बढ़ जाती है की हिंदी गरिमा की  पुनः स्थापना हो। सांसर इसके महत्व को जाने और अंतर्राष्ट्रीय  भाषा के रूप  में  इसका सम्मान हो। तभी हम अपने भाषा की ये धरोहर अपनी आने वाली पीढ़ियों तक पंहुचा सकते  है .

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